भारत में हर कोई कर रहा है कोरोना पर पीएचडी !


सूत्र | 27 Jun 2020 | 2448

भारत में हर कोई कोरोना का इलाज करने का दवा करने लगा है। कोई काढ़ा को कोरोना की दवा बता रहा है तो कोई गिलोय  का पत्ता खाकर ,कोई गरम पानी का नुक्सा समझा रहा है तो कोई हल्दी दूध का लेकिन हकीकत इससे बिलकुल इतर  है। 

कोरोना के अधिकांश मरीज अगर कोरोना की कोई दवा न खाएं तो भी १०-१५ दिन में सिर्फ ठीक से भोजन करने से सही हो जाते हैं. इसी क्रम में बाबा रामदेव की भी दवा आती है जो की उन मरीजों पे प्रयोग की गई है जिनके माइल्ड लक्षण थे या बिना लक्षण वाले जो ९९ प्रतिशत वैसे भी सही हो जाते। 

इम्युनिटी सब्द जो आज ज़िंदगी का पर्याय बन चूका है वो भारतीय संस्कृति में पहले से ही है।  यहाँ सदियों से लोग एक उम्र के बाद च्वनप्राश या मुर्राबा का सेवन करते आ रहे थे। मौजूदा दौर में पश्चात सभ्यता वाला व्यंजन जैसे पीजा और बर्गर लेता जा रहा है 
जिसके कारण आज हमें महामारी से जरुरत से ज्यादा सजक होने की जरुरत पद रही है।  

हम आप से अनुरोध करते हैं की की कृपया आप लोग भी पीएचडी न करके सिर्फ सजक रहें और बाबा रामदेव की तरह कोरोना पर अपने उपायों को न थोपे। WHO के द्वारा सुझाये गए नियमों का पालन करें और स्वस्थ रहें। 
 


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