मुंबई महाराष्ट्र को छोड़कर जाने वाले पढ़ें:संजय गुप्ता


Source PBH | 16 May 2020 | 214

 अगर आप लोग रुक जाते तो पेट को भोजन-सोने की छत आपको मुफ्त में मिलती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि जो जहाँ है वहीं रहे। घर में रहें सुरक्षित रहें। लोगों ने लाॅकडाउन का जमकर उल्लंघन किया। तीसरा लाॅकडाउन शुरू हो गया है लेकिन आप सब नहीं मान रहे हो। आप लोग तो ऐसे उत्पात मचा रहे हैं गांव जाने के लिए कि जैसे गांव पहुंचते ही सभी प्रकार की आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक समस्यायें समाप्त हो जायेंगी। मैं भी उसी उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हूं और मैं अच्छे से जानता हूँ कि वहां पर कौन, कितने बड़े जमींदार परिवार से संबंध रखता है। और आजीविका के कितने साधन उपलब्ध है। राज्य के मुख्यमंत्री माननीय उद्धव ठाकरे साहब व उनकी टीम दिन रात रणनीति बना रही है विषम परिस्थितियों में भी कोरोना योद्धा लगातार सेवा में लगे हैं । मुंबई में कोरोना को लेकर झोपड़पट्टी स्लम एरिया सबसे चुनौती पूर्ण क्षेत्र है। क्योंकि झोपड़पट्टियों में घर बहुत ही छोटे होते हैं एवम एक छोटे से 100 स्क्वायर फिट के घर मे अधिक संख्या में लोग रहते हैं फिर भी शासन प्रशासन पूरी निष्ठा से जनता की सेवा कर रहा है । मेरे जानकारी में हजारों की संख्या में उत्तर भारतीय आज कोरोना योद्धा के रूप में देवदूत बन महाराष्ट्र की भूधरा की सेवा कर रहे हैं । वरिष्ठ समाजसेवी व पत्रकार अशोक दुबे जी वर्ली में रहते हैं दुबे जी के सुपुत्र बीएमसी सायन हॉस्पिटल में डॉक्टर हैं जो कोरोना की ड्यूटी दे रहे हैं , दुबे जी कहते हैं यह समय मुंबई के साथ रहकर उसके जख्मों पर मरहम लगाने का समय है साथ ही आज जो भी कुछ हुँ मुंबई की वजह से हूँ जियेंगे भी मुंबई के साथ और मरेंगे भी मुंबई के साथ ।" धन्य हो अशोक दुबे जी आप महान हो आप जैसे लोगों की वजह से यह संसार चल रहा है । मुंबई में कोई भूखा नहीं सोता, यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं है, यह यथार्थ है । जिस प्रकार से तमाम राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक संगठन, दिन रात, पिछले दो महीनों से सबको भोजन, पानी दे रहे हैं, वह केवल और केवल मुंबई में संभव है और आप उसी मुंबई को ठुकरा कर गांव जाने के लिए उत्पात/ नंगई पर उतारू हो। थोड़ी सा प्राकृतिक संकट आया और आप मुंबई छोड़ कर भागने पर आमादा हो गए और कौन सी जमींदारी छोड़ कर आये हो उत्तर प्रदेश में??? अधिकांश लोगों के पास एक एकड़ ज़मीन भी तो नहीं होगी शायद एक आदमी के हिस्से में?? वहां कौन खिलायेगा और कितने दिन खिलायेगा?? वहां मुफ्त में चार दिन भी नहीं खा पाओगे। कितने बड़े-बड़े कारखाने, मिल, कंपनियां, फैक्टरियां हैं वहां, मुझे सब पता है। आज उत्तर प्रदेश के गाँव मे नब्बे प्रतिशत घरों की तो यह हालत है कि किसी प्रयोजन या कार्यक्रम में जब पूरा परिवार इकट्ठा हो जाता है तो सोने के खटिया भी कम पड़ जाती है। और तुम वहां जाकर झंडा गाड़ने का सपना देख रहे हो। चार दिन से ज्यादा बिना पैसे के, वहां जी नहीं पाओगे। वहां की गर्मी सर्दी बरसात की उमस ज्यादा दिन नहीं झेल पाओगे। कायदे से, नियंत्रित ढंग से हम सब रहे होते तो, यह बीमारी अब तक समाप्त हो चुकी होती। लेकिन आप सबने यहां भी संक्रमण फैलाया और अब उत्तर प्रदेश जाकर वहां भी फैलाओगे। वहां पहुंचने के बाद 14 दिन क्वारंटीन में रहने का प्रबंध हो चुका है। दुखद है कुछ लोग साईकिल, मोटर साईकिल, ट्रक, मालगाड़ी में छुपकर मुम्बई से उत्तर प्रदेश पहुँच चुके है। इनमें से कुछ संक्रमित या बीमार भी हो सकते है। एक बात तो यह स्पष्ट हो गयी कि राज ठाकरे सच कहते थे कि तुम पर प्रांतीय हो। आज तुमने सच सिद्ध कर दिया कि तुम केवल पैसा कमाने की लालच में मुंबई आये थे। आपको मुंबई की मिट्टी से, मुंबई से कोई लगाव नही। आप सबको जरा सा भी अपनापन नहीं मुंबई की धरती से, वह धरती जिसने तुम्हारे जैसे मौकापरस्त लोगों को अब तक पाला पोसा। यह मुम्बई के साथ छल कर रहो हो। अब आप लोग ये भी रो रहे हो कि सरकार गांव जाने के लिए 740 रू रेल टिकट का भाड़ा ले रही है। तो इतने वर्ष मुंबई में रहकर क्या पराक्रम किया तुमने कि रेल टिकट भी नहीं खरीद पा रहे हो? खैर सरकार अब आपसे किराया भी नहीं लेगी। 10 दिन और इन्तजार कीजिए- आप सब अपने गाँव पहुँचने लगोगे। जाओ, लेकिन याद रखना कि जरा सा भी स्वाभिमान, गैरत और आत्मसम्मान हो तो वापस मत आना क्योंकि मुंबई जिंदादिल लोगों का शहर है, संकट की घड़ी में भागने वालो के लिए यहां जगह नहीं है। मुझे भी अपनी मातृभूमि उत्तर प्रदेश से बहुत लगाव है लेकिन कर्मभूमि भी बहुत प्यारी है। हम मुम्बई में ही रहेंगे और कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त करेंगे। मी मुंबईकर जय महाराष्ट्र जय हिंद जय भारत संजय गुप्ता (हमारा मेट्रो , स्वराज सवेरा )



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