जल में रहकर भी मछली नही खाता है ये मगरमच्छ,मंदिर का प्रसाद खाकर रहता है जिंदा,शाकाहारी मगरमच्छ


Source PBH | 08 Jan 2020 | 802

 केरल में मंदिर के तालाब में रहने वाला एक मगरमच्छ अपनी प्रकृति खिलाफ पूर्ण रूप से सात्विक और शाकाहारी होने के लिए सुर्खियों में बना हुआ है। इस मगरमच्छ का नाम बबिया है। मगरमच्छ बबिया को नॉनवेज का शौक नहीं है और वह मंदिर में मिलने वाला प्रसाद ही खाता है। केरल के कसारागोड में आनंदपद्मनाभ स्वामी मंदिर के तालाब में रहने वाला मगरमच्छ अपनी प्रकृति खिलाफ पूर्ण रूप से सात्विक और शाकाहारी होने के लिए सुर्खियों में बना हुआ है। इस मगरमच्छ का नाम बबिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंदिर दावा करता है कि मगरमच्छ बबिया को नॉनवेज का शौक नहीं है और वह मंदिर में मिलने वाला प्रसाद ही खाता है। मगरमच्छ को दिन में दो बार गुड़ और चावल का प्रसाद दिया जाता है। मजे की बात यह है कि जिस तालाब में बबिया रहता है, उसकी मछलियों को भी उससे टेंशन नहीं है, बबिया के शाकाहारी होने की वजह से वे महफूज रहती हैं। लोगों के बताने के मुताबिक मंदिर के आस-पास दूर-दूर तक न तो कोई नदी है और न ही झील है, लेकिन मंदर के तालाब में करीब डेढ़ सौ वर्षों से एक मगरमच्छ दिखाई देता आ रहा है। बबिया के यहां 70 से ज्यादा वर्षों से होने की बात कही जाती है। कहा जाता है कि मंदिर के तालाब में हमेशा एक ही मगरमच्छ रहता है, लेकिन वह आता कहां से है, किसी को नहीं पता। यह भी कहा जाता है कि अगर एक मगरमच्छ मरता है तो उसकी जगह दूसरा आ जाता है। स्थानीय लोगो के अनुसार यह भगवान का मगरमच्छ हैं, इसलिए इसके पास जाने पर यह नुकसान नहीं पहुंचाता है। यह मंदिर कसारागोड जिले के अनंतपुर नाम के छोटे से गांव में बना है। इस मंदिर को तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभ स्वामी के मंदिर के मूलस्थान के तौर पर जाना जाता है।



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