थमा नही टकराव:कृष्णेन्द्र राय


Source PBH | 01 Jun 2021 | 91

केंद्र और ममता।

 थमा नहीं टकराव।।

 बढ़ रही हैं बातें।

 ना आया ठहराव।। 

पनप रही प्रतिदिन।

 नई नई रार।।

 कब होगा समाप्त ?

 ये आपसी तकरार।।

 रहा यदि ये हाल। 

जनता से अन्याय।।

 लौटे स्वर्णिम काल। 

हो ऐसा उपाय।। 

रोज-रोज के झगड़े।

 हैं होते दु:खदाई।।

 ढूंढ़ना ही होगा। 

जिसने आग लगाई।।



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