98 वें वर्षीय साहसी बुजुर्ग,सड़क पर बेच रहे चना,जिम्मेदार अधिकारियों ने बंद कर रखी है अपनी ऑखे


Dhananjay Singh | 28 Feb 2021 | 325

रायबरेली।कहते है कि पापी पेट का सवाल है,ये पापी पेट न उम्र को देखता है न ही मौसम देखता है।पेट की आग और परिवार की वो जिम्मेदारी है जो हर उमर में ये रात की चैन की नीद और सुकून को निगल जाता है। आपके सामने 98 वें वर्ष के इन बुजुर्ग को देखिए। अपना और अपने परिवार के लिए उम्र के इस आखरी पड़ाव में भी होने के बाद भी चने का ठेला लगे रहे हैं।पूरे दिन में चने बिकने से जो कमाई होती है उसी से बुजुर्ग अपने परिवार का खर्च चलाते है। 98 वें वर्षीय बुजुर्ग विजयपाल सिंह उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के कंडोरा गांव के निवासी हैं और इनके कमजोर कंधों पर परिवार के जिम्मेदारी का बहुत बड़ा दायित्व है।सुबह होते ही बुजुर्ग ठेले पर चना लेकर सड़कों पर बेचने के लिए निकलते हैं। विजयपाल सिंह बताते हैं कि एक बेटा है वो अपना परिवार लेकर दिल्ली में मजदूरी करता है।जो आमदनी उसकी हो रही अपना खर्च चलाना मुश्किल है।बेटे पर तीन बेटियों की शादी की भी बड़ी जिम्मेदारी है। उसके हिस्से का जो थोड़ा बहुत खेत है उसे भी विजयपाल सिंह खुद देखरेख करते हैं। विजयपाल सिंह कहते हैं कि इस उमर में ठेला लगा कर हम अपना खर्च किसी तरह निकाल लेते हैं। 22 साल पहले उनके हाथ की उंगली तक कट गई लेकिन उन्होंने हिम्मत नही हारी अभी तक रोज ठेला लेकर निकलते हैं। घर का हाल ये है कि न ही सरकारी हैंडपंप है और न ही शौचालय। इससे साफ साफ प्रतीत हो रहा है कि सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस बुजुर्ग विजयपाल सिंह की तरफ ध्यान नही दिया है।जिम्मेदार अधिकारी बुजुर्ग विजयपाल सिंह की तरफ ध्यान देना मुनासिब नहीं समझ रहे है।



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