प्रयागराज और वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी


Dhananjay Singh | 30 Nov 2020 | 394

 लखनऊ।पूरे देश में कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।कार्तिक महीने को भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना के लिए बहुत खास माना जाता है।कहा ये भी जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन सच्चे मन से भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन गंगा स्नान, जप और दान का विशेष महत्व बताया जाता है।कार्तिक पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर देश के कोने-कोने से भक्त गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए गंगा घाटों पर पहुंचते हैं।मान्यता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से सभी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रयागराज और वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा के इस खास अवसर पर गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी गंगा घाटों पर तमाम श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।प्रयागराज संगम घाट पर श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के साथ गंगा घाट पर पूजा-अर्चना की तो वहीं भगवान शिव की पवित्र नगरी काशी (वाराणसी) में कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए भक्त गंगा घाटों पर पहुंचे। इस अवसर पर राज घाट पर भक्तों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना की। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक़ कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरारी अवतार लेकर त्रिपुरासुर का वध किया था और देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। त्रिपुरासुर के आतंक का अंत होने की खुशी में देवताओं ने दीप जलाकर देव दीपावली का उत्सव मनाया था। कहा जाता है कि हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवता धरती पर काशी नगरी में देव दिवाली का त्योहार मनाने के लिए आते हैं। इस दिन गंगा घाटों को दीपों की रोशनी से रोशन किया जाता है और दीपदान किया जाता है।



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