राकेश टिकैत किसानों के काफिले के साथ दिल्ली हुए रवाना ,देखे वीडियो


Dhananjay Singh | 27 Nov 2020 | 576

मुजफ्फरनगर।पंजाब व हरियाणा के किसानों द्वारा कृषि कानून के विरोध के समर्थन में आज भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के अगुवाई में किसानों ने नावला कोठी पर हाईवे को जाम कर दिया। लेकिन दोपहर बाद चौधरी राकेश टिकैत की अगुवाई में किसानों ने दिल्ली तरफ कूच कर दिया।टिकैत ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान भी पंजाब व हरियाणा के किसानों समर्थन में दिल्ली का घेराव करेंगे। टिकैत ने कहा कि अब रास्ता जाम नहीं करना है। फोर लेन हाईवे पर सीधे हाथ पर लोग, ट्रैक्टर, गाड़िया चलते रहेंगे। जाम नहीं लगाना जहां रात होगी वहीं रुकेंगे। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत की अगुवाई में आज किसानों ने मंसूरपुर के पास नावला कोठी पर हाईवे पर अपनी टै्रक्टर ट्रालियां खड़ी कर जाम लगा दिया।हाईवे पर यातायात रुक जाने से वाहनों को वैकल्पिक मार्गो से निकाला गया। कल पंजाब व हरियाणा के किसानों के समर्थन में जाम के ऐलान के बाद आज सुबह से ही पुलिस भी एलर्ट थी। हालांकि किसानों ने वहां पहुंच कर जाम लगा दिया। इस बीच वहां पहुंचे अधिकारियों के समझाने बुझाने का भी उन पर कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद राकेश टिकैत ने ऐलान किया कि पंजाब से आए किसानों की मदद करने के लिए उत्तर प्रदेश के किसान दिल्ली को घेरेंगे। राकेश टिकैत ने कहा यु( शुरू हो चुका। जिसे शामिल होना है वह होता जाए। इस ( में जो घायल होगा, वह वापस लौटता रहेगा, दूसरे नए लोग शामिल हो उनकी जगह लेंगे। राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों का जत्था कल शाम 5.00 बजे तक किसान क्रांति गेट तक पहुंचेगा । राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि भारत सरकार से किसानों की लड़ाई शुरू हो चुकी है। हालत खराब हो चुके हैं। अब न्याय के लिए दिल्ली घेरी जाएगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा व उत्तर प्रदेश सरकार से यह लड़ाई नहीं है बल्कि केंद्र सरकार से है। राकेश टिकैत ने आसपास के जिलों से भी किसानों को जत्थे बनाकर किसान क्रांति गेट पर आने के लिए कहा। उल्लेखनीय रहा के भाकियू के गढ़ मुजफ्फरनगर में नवला मौड पर उम्मीद अनुसार भारतीय किसान यूनियन भीड़ नहीं जुटा पाया। इसका कारण इस समय गन्ने को लेकर किसानों की व्यस्तता बताया गया है। भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख चैधरी नरेश टिकैत भी धरना में शामिल नहीं हुए। खतौली बाईपास होते हुए कूच करने की बात तय होने के बाद किसान पैदल चलते हुए आगे बढ़े। किसानो के साथ उनके ट्रैक्टर और कारों का काफिला भी था। आज सुबह से ही किसान आंदोलन को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस भी हाई अलर्ट रही। किसान आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली एनसीआर के गाजियाबाद में मेट्रो सेवा दोपहर दो बजे तक के लिए बंद कर दी गई। मेट्रो बंद होने से रोज इस सेवा का इस्तेमाल करने वाले लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ है। मेट्रो स्टेशन से बड़ी संख्या में लोग निराश होकर वापस लौट गए। मेट्रो बंद करने के बारे में पूर्व में कोई जानकारी न मिलने को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। उन्हें स्टेशन पहुंचने पर पता चला कि मेट्रो नहीं चलेगी और वहां से वापस लौटना पड़ा। कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब और हरियाणा के बाद अब यूपी के किसान भी सड़कों पर उतर आए हैं। दिल्ली कूच अभियान के तहत सैकड़ों की संख्या में आज किसान दिल्ली के लिए रवाना हुए तो पुलिस ने रास्ते में उन्हें रोक लिया गया। किसानों के विभिन्न संगठनों ने कृषि कानून का जमकर विरोध किया। शुक्रवार को मथुरा में किसान यमुना एक्सप्रेस-वे पहुंचकर वहां धरने पर बैठ गए। किसानों के हाईवे पर बैठने की सूचना से पुलिस अफसरों में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते हाईवे भीषण जाम लग गया। जाम की सूचना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन किसानों के विरोध के आगे पुलिस की एक न चली। देखते ही देखते हाईवे पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। वाहन भी रेंग-रेंग कर चल रहे थे। आपको बता दें कि केन्द्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान दो दिवसीय दिल्ली में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार और शुक्रवार को हो रहे धरना प्रदर्शन के तहत किसानों ने मार्च निकाला। इसे रोकने के लिए हरियाणा और पंजाब सरकार ने अपने बॉर्डर सील कर दिए। दिल्ली चलो अभियान के तहत यूपी के किसानों ने भी समर्थन किया। यूपी पुलिस भी बॉर्डर पर तैनात कर दी गई है। कृषि कानून के विरोध के चलते उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन के आह्वान पर पश्चिमी यूपी में कई जगह किसानों ने हाईवे जाम कर दिया। दिल्ली-देहरादून, मेरठ-पौड़ी हाईवे पर किसान धरना देकर बैठ गए। भाकियू के नेता राकेश टिकैत ने ऐलान किया था कि कृषि कानून के विरोध में यूपी में किसानों का एक बड़ा दल सड़क पर उतरेगा। भाकियू के आह्वान पर शुक्रवार को किसानों ने सबसे पहले यमुना एक्सप्रेस-वे हाईवे पर जाम लगाया। इसके बाद किसानों ने दिल्ली-देहरादून हाईवे को भी जाम कर दिया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने केन्द्र सरकार के कृकृषि कानून को वापस लेने की मांग की थी। केन्द्र सरकार की ओर से पारित नए कृषि बिल से न्यूनतम समर्थन मूल्य के खत्म होने का डर है। अब तक किसान अपनी फसल को अपने आसपास की मंडियों में सरकार की ओर से तय की गई एमएसपी पर बेच देते थे। इस नए कानून से किसान कृषि उपज मंडी समिति से बाहर कृषि के कारोबार को मंजूरी दी है। इसके तहत किसानों को डर सता रहा है कि अब उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। केन्द्र सरकार अपने बयानों में कह रही है कि वह एमएसपी जारी रखेगी। इसके साथ ही देश में कहीं भी मंडियों को बंद नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन सरकार ने इस बात को नए कानून में नहीं जोड़ा है, इसी वजह से किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।



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