एक आईपीएस की पहल,54 फ्रेंच भाषाई देशों में छठ पूजा की महिमा किया बखान


Dhananjay Singh | 21 Nov 2020 | 136

लखनऊ। छठ आस्था का महापर्व है इसकी महिमा निराली है।छठ का त्यौहार सदियों से बिहार के लोगों के मन में अपनी मिट्टी और संस्कृति में लगाव और महान आस्था का संगम है।कई माध्यमों के तहत छठ के महापर्व की महिमा का वर्णन भी किया गया है।बिहार के जमुई जिले के निवासी आईपीएस अधिकारी कुमार आशीष के मुताबिक 14 साल पहले जब वो फ्रांस में स्टडी टूर पर गए हुए थे।एक संगोष्ठी में वहां कुछ फ्रेंच लोगों ने उनसे बिहार के बारे में कुछ रोचक और अनूठा बताने के लिए कहा तो आशीष ने बिहार के महापर्व छठ के बारे में विस्तार से उन लोगों को बताया।फ्रेंच लोगों पर छठ के महापर्व की जानकारी होने से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने कहा कि इस विषय पर फ्रांस के साथ फ्रेंच बोलने-समझने वाले अन्य 54 देशों तक भी इस पर्व की महत्ता और पावन संदेश पहुंचाना चाहिए।देश वापस लौटने के बाद आशीष ने इस छठ महापर्व के बारे में और गहनता से अध्ययन किया एवं बारीकी से शोध कर छठ पर्व को पूर्णत: परिभाषित करनेवाला एक लेख "Chhath Pouja: l'adoration du Dieu Soleil" लिखा जो कि भारत सरकार के अंग भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् दिल्ली के द्वारा फ्रेंच भाषा में "rencontre avec l'Inde" नामक किताब में 2013 में प्रकाशित हुई। लेख में है क्या है आशीष ने इस लेख में छठ पर्व के सभी पहलुओं का बारीकी से विश्लेषण कर फ्रांसीसी भाषा के लोगों के लिए इस महापर्व की जटिलताओं को समझने का एक नया आयाम दिया है। शुरुआत में वो बताते हैं कि छठ मूलत: सूर्य भगवान की उपासना का पर्व है।चार दिनों तक चलनेवाले इस पर्व में धार्मिक, सामाजिक, शारीरिक, मानसिक एवं आचारिक-व्यावहरिक कठोर शुद्धता रखी जाती है। छठ चार दिनों तक होता है त्यौहार के अनुष्ठान कठोर हैं और चार दिनों तक मनाया जाता हैं।इनमें पवित्र स्नान, उपवास और पीने के पानी (वृत्ता) से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना, और प्रसाद (प्रार्थना प्रसाद) और अर्घ्य देना शामिल है। परवातिन नामक मुख्य उपासक (संस्कृत पार्व से, जिसका मतलब 'अवसर' या 'त्यौहार') आमतौर पर महिलाएं होती हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में पुरुष इस उत्सव का भी पालन करते हैं क्योंकि छठ लिंग-विशिष्ट त्यौहार नहीं है। कुछ भक्त अपने घर से तालाब-नदी के किनारों के लिए आपादमस्तक लेटते हुए रूप में “दंड देते” हुए भी करते हैं। इस तरह शुरू हुआ छठ मान्यता है की देव माता अदिति ने भी छठ पूजा की थी।एक कथा के अनुसार प्रथम देवासुर संग्राम में जब असुरों के हाथों देवता हार गये थे, तब देव माता अदिति ने तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति के लिए देवारण्य के देव सूर्य मंदिर में छठी मैया की आराधना की थी।तब प्रसन्न होकर छठी मैया ने उन्हें सर्वगुण संपन्न तेजस्वी पुत्र होने का वरदान दिया था।इसके बाद अदिति के पुत्र हुए त्रिदेव रूप आदित्य भगवान, जिन्होंने असुरों पर देवताओं को विजय दिलायी कहते हैं कि उसी समय से देव सेना षष्ठी देवी के नाम पर इस धाम का नाम देव हो गया और छठ का चलन भी शुरू हो गया। 36 घंटे का व्रतधारी करते है व्रत छठ जैसी खगोलीय स्थिति (चंद्रमा और पृथ्वी के भ्रमण तलों की सम रेखा के दोनों छोरों पर) सूर्य की पराबैगनी किरणें कुछ चंद्र सतह से परावर्तित तथा कुछ गोलीय अपवर्तित होती हुई, पृथ्वी पर पुन: सामान्य से अधिक मात्रा में पहुंच जाती हैं।वायुमंडल के स्तरों से आवर्तित होती हुई, सूर्यास्त तथा सूर्योदय को यह और भी सघन हो जाती है।ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह घटना कार्तिक तथा चैत्र मास की अमावस्या के छ: दिन उपरान्त आती है।ज्योतिषीय गणना पर आधारित होने के कारण इसका नाम और कुछ नहीं, बल्कि छठ पर्व ही रखा गया है। छठ पूजा चार दिवसीय उत्सव है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को तथा समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है।इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते। इसके विभिन्न चरणों को आइये जानते हैं कोई भी रख सकता है व्रत छठ उत्सव के केंद्र में छठ व्रत है जो एक कठिन तपस्या की तरह है। यह छठ व्रत अधिकतर महिलाओं द्वारा किया जाता है; प्राय: काफी पुरुष भी इस व्रत को रखते हैं।व्रत रखने वाली महिलाओं को परवैतिन कहा जाता है। चार दिनों के इस व्रत में व्रति को लगातार उपवास करना होता है।भोजन के साथ ही सुखद शैय्या का भी त्याग किया जाता है।पर्व के लिए बनाये गये कमरे में व्रति फर्श पर एक कम्बल या चादर के सहारे ही रात बिताती हैं।इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नये कपड़े पहनते हैं। जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की गयी होती है व्रति को ऐसे कपड़े पहनना अनिवार्य होता है।महिलाएँ साड़ी और पुरुष धोती पहनकर छठ करते हैं। ‘छठ पर्व को शुरू करने के बाद सालों साल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला इसके लिए तैयार न हो जाए।घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है। कुमार आशीष कौन है आइये जाने इनके बारे में कुमार आशीष भारतीय पुलिस सेवा के 2012 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी हैं और वो मधेपुरा तथा नालंदा में एसपी के रूप में अपनी सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में किशनगंज जिले के एसपी के रूप में जनता के लिए कार्यरत हैं। आशीष सामुदायिक पुलिसिंग के विभिन्न सफल प्रयोगों के लिए बिहार सहित पूरे देश में जाने जाते हैं।उनके द्वारा शुरू किये गए कई प्रोग्राम(यथा, कॉफ़ी विथ एसपी, पिंक-पेट्रोलिंग, हॉक-मोबाइल पोलिसिंग, थाना-दिवस, मिशन-वस्त्रदान, पर्यटक-मित्र पुलिसिंग योजना आदि) आमलोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं और अपराध नियंत्रण करने काफी माहिर भी हैं।



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