मजबूत हो इरादे तो,मंजिल आसान


Dhananjay Singh | 17 Sep 2020 | 1010

ह्रदय में अगर ठान लो तो कठिन से कठिन काम भी आसान हो जाता है, बस ह्रदय में दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए,और कर्तव्य के प्रति सच्ची निष्ठा होनी चाहिए

 बचपन से हम एक कहानी कई बार सुनी है,एक खतरनाक डाकू था जिसका नाम अंगुलिमाल था लेकिन ये डाकू एक संत की वजह से बड़ा संत बन गया था, जो कहानी हम बताने जा रहे है वो पूरी तरह से हकीकत है,और इस कहानी के महानायक एक डीएसपी सिंघम हैं। बदायूं जिले के एक क्षेत्राधिकारी की हम बात कर रहे है।उझानी क्षेत्राधिकारी अनिरुद्ध सिंह की जो कई अच्छे गुडवर्क कर चुके है।अनिरूद्ध सिंह धनपुरा जैसे क्षेत्र में एक नई पटकथा लिखते हुए दिखायी दे रहे हैं,ये एक ऐसा क्षेत्र है जो सिर्फ अपराध के लिए जाना जाता था। सिर्फ एक व्यक्ति की वजह से समाज की मुख्यधारा से जुड़ना चाह रहे हैं,और देश के विकास में भूमिका निभाना चाहते हैं। अनिरुद्ध सिंह ने एक पहल की है जिसका नाम सम्मान योजना है।सम्मान योजना एक -एक पायदान आगे बढ़ेगी।और सम्मान योजना सफलता के एक पायदान पर और आगे बढ़ी भी है। सम्मान योजना के तहत अपराधी स्वयं अपराध का रास्ता छोड़ कर सही रास्ता व समाज की मुख्यधारा में लौट रहे है।इनके पुनर्वास की योजना है इनको स्वरोज़गार के तहत संबल बनाना है ताकी इनके परदादाओं ने जो वर्ष १९०२ ई० में अपराध को पेशा बनाया।बदायूं का बाबरिया गिरोह पूरे भारत में कुख्यात है,आज अपने कुख्यात जीवन को छोड़ कर इज़्ज़त से कमाना खाना चाहता है और अपने गाँव को एक आदर्श गाँव बनाना चाहता है।उझानी क्षेत्राधिकारी अनिरुद्ध से ने बताया कि जब मैं धनुपुरा गाँव से लौट रहा था तो रास्ते में कुछ महिलायें और बच्चियों का झुण्ड खड़ा था मेरी गाड़ी देख कर हाँथ देकर रोका और बच्चियों ने कहा सर हम पढ़ना चाहते है और पढ़ कर अध्यापक बनना चाहते है ताकी अपने गाँव के लोगों को पढ़ा सके और हमको हमारे बाप दादा के सर्वनाक धंधे से मुक्ति दिला दें।



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